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नवरात्रि का पहला दिन, ढाक की थाप से गूँजती कोलकाता की गलियाँ, जगमगाते पंडाल और रसगुल्लों की मिठास के बीच, छोटी-सी आरू के मन में उठता है एक बड़ा सवाल कि माँ दुर्गा के नौ रूप कौन-कौन से हैं और उनकी कहानी क्या है।
इसी जिज्ञासा से शुरू होती है हमारी यात्रा। पंडाल की भीड़ में, मोहल्ले के प्यारे काकाबाबू बच्चों को सुनाते हैं माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की कथा। देवी सती से लेकर माता पार्वती के रूप में पुनर्जन्म तक, और वृषभ पर सवार त्रिशूल-धारिणी माँ शैलपुत्री की दिव्यता तक, यह कथा सिर्फ़ एक पुराण गाथा नहीं, बल्कि धैर्य और स्थिरता की सीख भी है।
तो जानिए क्यों नवरात्रि की शुरुआत माँ शैलपुत्री की पूजा से होती है, और कैसे उनके आशीर्वाद से भक्त को कठिनाइयों में भी डटे रहने की शक्ति मिलती है।