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नवरात्रि के आठवें दिन पूजी जाती हैं माँ महागौरी, जिनका रूप शुद्धता, शांति और करुणा का प्रतीक है।
माँ महागौरी का शरीर हिम की तरह श्वेत और तेजस्वी है, उनके वस्त्र भी श्वेत हैं। उनके चार हाथों में से दो में त्रिशूल और डमरू हैं और 2 हाथों से वह वरदान और अभय प्रदान करती हैं। उनका वाहन नंदी बैल है। उनकी कहानी यह बताती है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की।
तपस्या के बाद भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और उनके शरीर को गंगा जल से स्नान कराकर महागौरी का तेजस्वी, निर्मल और सुंदर रूप प्रदान किया। माँ महागौरी अपने भक्तों के पाप और दुखों को धो देती हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करती हैं।
अष्टमी के दिन उनकी पूजा से मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है, और भक्त अपने जीवन में स्थिरता और धैर्य प्राप्त करते हैं।
तो जानिए कैसे तपस्या, भक्ति और ईश्वर की कृपा से माता पार्वती बनीं महागौरी, और क्यों उनका यह स्वरूप हमारे जीवन में शांति और समृद्धि लाता है।