Pratidin Ek Kavita · 29 सित॰ 2026 · 1:41
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हवा जब आएगी | चंपा वैद
हवा जल आएगी अकेली
बैठा लूँगी अपने पास
चले चलेंगे हम दोनों
उस कविता के पर्वत पर
उड़ते, पेड़ लगाते, एक हज़ार
चश्मों से एकत्रित कर जल
और सूरज के प्रबल प्रकाश
मैं भी धूप बटोरूँगी दिन भर
हवा तुम्हारे साथ