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Pratidin Ek Kavita

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Hulchal | Anurag Tiwari

Pratidin Ek Kavita · 4 जुल॰ 2026 · 2:47

0:002:47

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हलचल।  अनुराग तिवारी 


तेज़ कुछ भी हो सकता है

किंतु

सबसे तेज़ क्या है


चीते की चाल

बाज़ की नज़र

नहीं।

सबसे तेज़ हलचल होती है

जैसे आज एक हलचल हुई,

मेरी आहट से दीवार पर चिपकी छिपकली

कोने में घुस गई।


सबसे तेज़ हलचल

 शेयर बाज़ार में नहीं होती!

एक्ज़िट पोल में भी हलचल तेज़ नहीं होती!

भारत पाक मैच में दिन भर हलचल रहती है

लेकिन सबसे तेज़ नहीं।


सबसे तेज़ हलचल

उस चेतना में होती है

जिसे भ्रम था सदैव स्वतंत्र रहने का!


सबसे तेज़ हलचल

उस राष्ट्र की भूमि में होती है

जिसे वरदान था अखण्ड होने का

जो सदा उर्वर रही वासियों के पोषण को!


सबसे तेज़ हलचल

उस पेट में होती है

जिसके चूहे आख़िरी साॅंस तक कूदने के बाद


अब मर चुके हैं!


सबसे तेज़ हलचल

उस हिरण की आंखों में होती है

जिसने देख लिया है बाघ

दूर से!


सबसे तेज़ हलचल

उस स्त्री की धड़कन में होती है

जिसने बाघ नहीं देखा

किंतु देख लिया है एक जानवर

जो मांस नहीं खाता

ख़ून नहीं पीता

हड्डियां भी नहीं चूसता

वह चमड़ियो को कूरेदता हुआ

नष्ट कर देता है आपकी आत्मा से

'आबरू' जैसा कोई शब्द!


एपिसोड: Pratidin Ek Kavita

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