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Pratidin Ek Kavita

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Laut Te Nahi Pita | Kumar Divyanshu Shekhar

Pratidin Ek Kavita · 5 जुल॰ 2026 · 2:00

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लौटते नहीं पिता । कुमार दिव्यनशु शेखर 


नीम-अँधेरे घर से निकले पिता

अँधेरे से पहले लौट आने की बात दोहरा के।

लौटी एक ख़बर

लौटा एक एम्बुलेस।

नीम-अँधेरे निकले पिता

फिर नहीं लौटे।

स्मृतियाँ लौट आती हैं

बार-बार

लौट आती हैं हिदायतें

लौटता है चेहरा

आँखों को बाँह ढाँपे लौट आता है सावन

लौटती है गंगा की धारा

गाय के नाँद में चारा

बारिश की नालियाँ-भुट्टों में बालियाँ

तुलसी का पत्ता-बया का जत्था

भोर की ओस

बेठोस

लौट आती है।

तारीख लौट आती है

लौटते नहीं पिता।


एपिसोड: Pratidin Ek Kavita

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