Podliपॉडकास्ट प्लेयर Webplayer

Pratidin Ek Kavita

Pratidin Ek Kavita

Pukare Ja Rahe Ho Ajnabee Se | Zafar Gorakhpuri

Pratidin Ek Kavita · 29 जुल॰ 2026 · 2:19

0:002:19

Podli ऐप में सुनें 🎧

अपने पसंदीदा पॉडकास्ट फ़ॉलो करें, ऑफ़लाइन और कार में CarPlay व Android Auto के साथ सुनें, और हमेशा वहीं से जारी रखें जहाँ छोड़ा था। मुफ़्त में आज़माएँ।

पुकारे जा रहे हो अजनबी से ।  ज़फ़र गोरखपुरी


पुकारे जा रहे हो अजनबी से चाहते क्या हो


ख़ुद अपने शोर में गुम आदमी से चाहते क्या हो

ये आँखों में जो कुछ हैरत है क्या वो भी तुम्हें दे दें


बना कर बुत हमें अब ख़ामुशी से चाहते क्या हो

न इत्मिनान से बैठो न गहरी नींद सो पाओ


मियाँ इस मुख़्तसर सी ज़िंदगी से चाहते क्या हो

उसे ठहरा सको इतनी भी तो वुसअत नहीं घर में


ये सब कुछ जान कर आवारगी से चाहते क्या हो

किनारों पर तुम्हारे वास्ते मोती बहा लाए


घरौंदे भी नहीं तोड़े नदी से चाहते क्या हो

चराग़-ए-शाम-ए-तन्हाई भी रौशन रख नहीं पाए


अब और आगे हवा की दोस्ती से चाहते क्या हो


एपिसोड: Pratidin Ek Kavita

Podliमुफ़्त Podli ऐप डाउनलोड करें
↓ App