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Pratidin Ek Kavita

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Sau Sau Janam Pratiksha Kar Lun | Bharat Bhushan

Pratidin Ek Kavita · 8 जुल॰ 2026 · 2:21

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सौ-सौ जनम प्रतीक्षा कर लूँ।  भारत भूषण


सौ-सौ जनम प्रतीक्षा कर लूँ

प्रिय मिलने का वचन भरो तो!


पलकों-पलकों शूल बुहारूँ

अँसुअन सींचू सौरभ गलियाँ


भँवरों पर पहरा बिठला दूँ

कहीं न जूठी कर दें कलियाँ


फूट पडे पतझर से लाली

तुम अरुणारे चरन धरो तो!


रात न मेरी दूध नहाई

प्रात न मेरा फूलों वाला


तार-तार हो गया निमोही

काया का रंगीन दुशाला


जीवन सिंदूरी हो जाए

तुम चितवन की किरन करो तो!


सूरज को अधरों पर धर लूँ

काजल कर आँजूँ अँधियारी


युग-युग के पल छिन गिन-गिनकर

बाट निहारूँ प्राण तुम्हारी


साँसों की ज़ंजीरें तोड़ूँ

तुम प्राणों की अगन हरो तो!


एपिसोड: Pratidin Ek Kavita

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