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Pratidin Ek Kavita

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Tadap Kar Jigar Munh Ko Aa Jaye Hai | Firaaq Gorakhpuri

Pratidin Ek Kavita · 28 अग॰ 2026 · 2:00

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तड़प कर जिगर मुँह को आ जाए है । फ़िराक़ गोरखपुरी


तड़प कर जिगर मुँह को आ जाए है


उसे देख कर कब रहा जाए है

किसू ने न अब तक बताया हमें


ग़म-ए-हिज्र में क्या किया जाए है

मोहब्बत में ऐ मौत ऐ ज़िंदगी


जिया जाए है या मरा जाए है

रुमूज़-ए-बहाराँ जो पूछो हो तुम


गुल अपने लहू में नहा जाए है

मुझे पा के तन्हा मिरी बेकसी


सर-ए-शाम बिस्तर लगा जाए है

मुझे गुमरही का नहीं कोई ख़ौफ़


तिरे घर को हर रास्ता जाए है


एपिसोड: Pratidin Ek Kavita

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