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वो शायर था लेकिन उसका असली काम कब्रें खोदना था. वो उसी कब्रिस्तान में रहता था जहां काम करते हुए उसके पिता ने उसे शायरी भी सिखाई और कब्र खोदना भी... वही पिता जिनके साथ हुए एक हादसे को वो उनकी मौत के बाद भुलाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन एक रोज़ कब्रिस्तान के गेट पर उसे एक खूबसूरत चेहरा दिखाई दिया और उसे पता चला एक राज.... सुनिए कहानी 'दिल आज शायर है' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.