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कांवड़ियों को राजनीति बिगाड़ रही? कांवड़ का असल इतिहास और इसके नियम: बाबामंडल, Ep 07

Babamandal · 9 अग॰ 2026 · 32:53

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सावन और कांवड़ यात्रा एक दूसरे के पूरक हैं. भगवान शिव की उपासना के इस महीने में कांवड़ यात्रा का ख़ास महत्व रहा है. लेकिन आए दिन जिस तरह की ख़बरें और वीडियो सामने आते हैं, उससे सवाल उठता है कि क्या कांवड़ यात्रा अपनी मूल पहचान खो रही है? क्या आजकल की राजनीति और ट्रेंड्स ने इस प्राचीन परंपरा को बदल दिया है? 'बाबामंडल' के इस एपिसोड में पाणिनि आनंद उर्फ़ बाबा कांवड़ यात्रा के उस सच को खंगाल रहे हैं जो अक्सर डीजे के शोर में दब जाता है.

इस पॉडकास्ट में जानेंगे:

कांवड़ का इतिहास: कांवरिया या कांवड़िया शब्द कहां से आया? क्या रावण पहला कांवड़िया था? परशुराम और श्रवण कुमार से जुड़े पौराणिक संदर्भ और गढ़मुक्तेश्वर से पुरामहादेव (बागपत) की यात्रा का महत्व

प्रमुख मार्ग और स्थान: सुल्तानगंज से देवघर (बाबा बैजनाथ धाम) तक की यात्रा, हरिद्वार-दिल्ली-एनसीआर रूट पर बढ़ती उग्रता और नासिक से रामेश्वरम तक के जल अभिषेक की परंपरा

धार्मिक परिक्रमाएं: बनारस की पंचकोशी, अयोध्या की 14 कोसी, और नर्मदा परिक्रमा जैसे कठिन संकल्पों का विश्लेषण

कांवड़ के नियम: वो कड़े नियम (जैसे विलासिता का त्याग, सात्विक भोजन, और अहिंसा) जिन्हें आज लगभग भुला दिया गया है

राजनीति और अराजकता: 1980 के दशक के बाद कांवड़ का 'ऑर्गेनाइज्ड' और 'पॉलिटिकल' होना. क्या हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा ने इसे एक वीआईपी इवेंट बना दिया है?

शिव का असली स्वरूप: क्या एक 'शिव भक्त' हिंसक और अपशब्द बोलने वाला हो सकता है? शिव की बारात का असली संदेश क्या है?


होस्ट: पाणिनि आनंद
प्रड्यूसर: कुमार केशव
साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह

एपिसोड: Babamandal

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