Shiv Puran Katha in Hindi · 1 मार्च 2026 · 5:55
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शिव पुराण का इक्कीसवां अध्याय देवी पार्वती की अद्भुत, कठोर और अलौकिक तपस्या का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के संकल्प के साथ पार्वती सांसारिक सुखों का त्याग कर गंगोत्री तीर्थ में घोर तपस्या आरंभ करती हैं।
वे पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का निरंतर जप करती हैं। फलाहार से प्रारंभ होकर पत्तों के त्याग और अंततः निराहार साधना तक उनकी तपस्या बढ़ती जाती है। भोजन त्याग देने के कारण देवताओं द्वारा उन्हें ‘अपर्णा’ नाम दिया जाता है।
तीन हजार वर्षों तक की गई यह तपस्या न केवल ऋषि-मुनियों के लिए आश्चर्यजनक थी, बल्कि संपूर्ण प्रकृति को भी पवित्र और दिव्य बना देती है। यह अध्याय भक्ति, संयम, धैर्य और शिव-प्राप्ति के लिए आत्मसमर्पण का दिव्य संदेश देता है।
एपिसोड: Shiv Puran Katha in Hindi