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बंदूक मेरी कनपटी पर थी और उंगली ट्रिगर पर. मेरी ज़िंदगी और मौत के बीच बस चंद लम्हों का फ़ासला था, लेकिन तभी मन किया कि ज़िंदगी की एक आख़िरी सिगरेट पी लूं - सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'स्टोरीबॉक्स' में.