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Gandhi पर इतनी किताबें लिखी जा चुकी हैं कि लगता है अब उनके बारे में कुछ नया कहने को बचा ही नहीं। फिर भी आज गांधी या तो बिना सवाल के ‘महात्मा’ हैं, या सोशल मीडिया पर गाली देने के लिए आसान निशाना।
प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल की किताब ‘मजबूती का नाम महात्मा गांधी’ इन दोनों आसान रास्तों से अलग गांधी को समझने की कोशिश करती है।
इस बातचीत में 1947 की वही पुरानी बहस नहीं, बल्कि गांधी के दिमाग, अंतर्विरोध, ज़िद और दर्शन को समझने की कोशिश है।
क्या गांधी की अहिंसा आम इंसान के बस की थी? क्या उनका आधुनिकता-विरोध एक खूबसूरत भ्रम था? खुद को गर्व से हिंदू कहने वाले गांधी पर मुस्लिम तुष्टिकरण और हिंदू-विरोधी होने के आरोप क्यों लगे? और गांधी की ‘मजबूती’ उनकी ताकत थी या हठधर्मिता?
इन्हीं असहज सवालों के जवाब देने के लिए हमारे साथ हैं प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल—पूर्व JNU प्रोफेसर, लेखक, कबीर और भारतीय साहित्य के गहरे अध्येता और UPSC के पूर्व सदस्य।
आइए, गांधी को न भक्त की तरह, न विरोधी की तरह बल्कि सवाल पूछने वाले की तरह समझने की कोशिश करते हैं।