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Padhaku Nitin

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Jantar Mantar की असली कहानी: Raja Jai Singh की Laboratory या Indian Protest का मंदिर? : Padhaku Nitin

Padhaku Nitin · 16 अक्टू॰ 2026 · 1:30:18

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क्या इंसान को जीने के लिए सिर्फ़ खाना और पानी चाहिए? अगर ऐसा होता, तो न्याय की माँग करते हुए लोग अनशन क्यों करते? भारत में जब भी किसी ने अपने हक़ और इंसाफ़ के लिए आवाज़ उठाई, तो दिल्ली के एक ठिकाने का नाम बार-बार सामने आया — जंतर-मंतर।

पिछले तीन दशकों में किसान आंदोलन से लेकर पहलवानों के प्रदर्शन, बेरोज़गार युवाओं की माँगों से लेकर निर्भया को इंसाफ़ दिलाने की लड़ाई तक, जंतर-मंतर ने कई आंदोलनों को आवाज़ दी है। लेकिन आज यही जगह एक नई बहस के केंद्र में है। चर्चा है कि यहाँ प्रदर्शनों की इजाज़त पर रोक लग सकती है।

मगर जिस जंतर-मंतर को हम आज विरोध और प्रतिरोध की जगह के तौर पर जानते हैं, उसकी अपनी कहानी क्या है? इसे किसने बनवाया? इसका नाम जंतर-मंतर क्यों पड़ा? और आख़िर यह है क्या — मंदिर, किला या कोई ऐसी इमारत, जिसका असली मक़सद हम भूल चुके हैं?

इस एपिसोड में समझेंगे जंतर-मंतर का इतिहास, विज्ञान से उसका हैरतअंगेज़ रिश्ता और उन इमारतों की कहानी, जो इससे प्रेरित होकर बनाई गईं। जानेंगे कि सदियों पहले बने इन विशाल उपकरणों का इस्तेमाल खगोलीय घटनाओं को समझने और समय मापने के लिए कैसे किया जाता था।

इस ऐतिहासिक सफ़र में हमारे साथ हैं इतिहासकार और वास्तुकार अनीशा मुखर्जी, जो Jantar Mantar, Maharaja Sawai Jai Singh’s Observatory in Delhi की लेखिका हैं।

देखिए पढ़ाकू नितिन का यह ख़ास एपिसोड और जानिए उस जंतर-मंतर की कहानी, जिसे आज हम विरोध प्रदर्शनों के लिए जानते हैं, लेकिन जिसकी पहचान कभी विज्ञान और खगोलशास्त्र से जुड़ी थी।

एपिसोड: Padhaku Nitin

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